Saturday, 7 May 2011

चिड़ियों का चहकना



आज ब्रह्म मुहूर्त में
फिर चिड़ियों का चहकना सुना,
बरसों बाद.

सुबह सूरज सर तक चढ़ आने पर
टाईमपीस की तीखी स्वर-लहरी
किचन में बर्तनों की बतकही
बहते समाचार-
बार-बार बाज़ार जाकर कर सामान लाने का पत्नी का निर्देश,
भोजन करते समय,
शाम को लौटते हुए कुछ और लाने का आदेश.

पूरे दिन कचहरी में
कानों के आर-पार होती
'हाज़िर हो ' की आवाजें,
बहस-मुबाहसे-जिरह के खुलते-बंद होते दरवाज़े.

रiत को देर तक
फाइलों से माथा पच्ची
किताबों की सरसराहट,
और फिर सो जाने तक, पूरे दिन के गुज़रे हर पल की
ज़ेहन में प्रतिध्वनि - स्पष्ट आहट.

आज ब्रह्म मुहूर्त में
फिर चिड़ियों का चहकना सुना,
बरसों बाद.

--- तरुण प्रकाश

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